जिस ओर नजर फेरूं दादी, चहुँ ओर नजारा तेरा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जिस ओर नजर फेरूं दादी,

चहुँ ओर नजारा तेरा है,

सतियों में तू सिरमौर है माँ,

साँचा ये द्वारा तेरा है,

जिस ओर नजर फेरूँ दादी,

चहुँ ओर नजारा तेरा है ॥

तू मेरी है मैं तेरी हूँ,

तू चंदा है मैं चकोरी हूँ,

तेरे होते ही रोशन दादी,

किस्मत का सितारा मेरा है,

जिस ओर नजर फेरूँ दादी,

चहुँ ओर नजारा तेरा है ॥

मैं तेरा ध्यान लगाती हूँ,

माँ पास तुझे मैं पाती हूँ,

दुनिया की ना दरकार मुझे,

बस एक सहारा तेरा है,

जिस ओर नजर फेरूँ दादी,

चहुँ ओर नजारा तेरा है ॥

तू हाथ पकड़ के चलती है,

तुझसे ही मेरी हस्ती है,

नैया की खेवनहार तू ही,

तू ही तो किनारा मेरा है,

जिस ओर नजर फेरूँ दादी,

चहुँ ओर नजारा तेरा है ॥

मेरी डोर तुम्हारे हाथों में,

‘स्वाति’ की बसी हो सांसो में,

कहे ‘हर्ष’ वही मुड़ जाती हूँ,

जिसे जगत ईशारा तेरा है,

जिस ओर नजर फेरूँ दादी,

चहुँ ओर नजारा तेरा है ॥

जिस ओर नजर फेरूं दादी,

चहुँ ओर नजारा तेरा है,

सतियों में तू सिरमौर है माँ,

साँचा ये द्वारा तेरा है,

जिस ओर नजर फेरूँ दादी,

चहुँ ओर नजारा तेरा है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।