जिन्हां दे शंकर हों सहाई

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जिन्हां दे शंकर हों सहाई

जेहड़े, शिव मंदिर विच आवंदे,

शंकर, जी दा नाम ध्यावंदे ॥

ओहो भगत ने मुक्ति पावंदे,

जिहड़े भगत निराले ने,

जिन्हां दे, शंकर, हों सहाई,

किन्ने, किस्मत वाले ने ॥

Santo Ki Vani lyrics

एथे, कष्ट कटाए जांदे,

एथे, भाग जगाए जांदे ।

एथे, दुनिया दे, बाली नाल,

सब दे, तार मिलाए जांदे ॥

एथे, जनमां तो, बंद किस्मत दे,

खुल जांदे ताले ने,

जिन्हां दे, शंकर, हों सहाई,

किन्ने, किस्मत वाले ने ॥

सोहणे, मंदिर सजा लिए ने ॥

दरस, जो पावण प्रभू दा,

किन्ने, किस्मत वाले ने ॥

जिन्हां दे, शंकर, हों सहाई,

किन्ने, किस्मत वाले ने ॥

महादेव दे, दर्शन कर लो,

आ के, खाली झोली भर लो ।

एथे, दुनिया, तर गई ऐनी,

भव सागर तो, तुसीं वी तर लो ॥

डोरी, शिव शंकर ते, छड्ड लो ॥

रोशन, खुद रखवाले ने,

जिन्हां दे, शंकर, हों सहाई,

किन्ने, किस्मत वाले ने ॥

घर-वार, वसा दियो जी ॥

प्रभू मेरी, अरज़ सुनो,

कारोबार, चला दियो जी ॥

जिन्हां दे, शंकर, हों सहाई,

॥ दोहा ॥

किन्ने, किस्मत वाले ने ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।