झोली भर लो भक्तो, दौलत बरसे भोले के दरबार

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

झोली भर लो भक्तो,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी,

दातारि का क्या कहना है,

दातारि का क्या कहना,

सरकारों की सरकार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥

रंग रंगीला महीना देखो,

सावन भोले बाबा का,

जैसे सावन बरसे वैसे,

बरसा दे भंडार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥

देते देते ये ना हारे,

तू लेते थक जाएगा,

भर भर मुट्ठी खूब लुटाए,

ऐसा है दातार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥

‘बनवारी’ शिव के भक्तो का,

देखा ठाठ निराला जी,

बारह महीना मने दिवाली,

मौज करे परिवार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी ॥

झोली भर लो भक्तो,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भर ल्यो जी,

दातारि का क्या कहना है,

दातारि का क्या कहना,

सरकारों की सरकार,

झोली भर ल्यो जी,

झोली भर लो भक्तों,

दौलत बरसे भोले के दरबार,

॥ दोहा ॥

झोली भर ल्यो जी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।