जीण माता की आरती

पारंपरिक
अन्य आरती aarti anya
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय श्री जीण मइया

बोलो जय श्री जीण मइया

सच्चे मन से सुमिरे

सब दुःख दूर भया ॥

ॐ जय श्री जीण मइया

ऊंचे पर्वत मंदिर

शोभा अति भारी

देखत रूप मनोहर

असुरन भयकारी ॥

ॐ जय श्री जीण मइया

महासिंगार सुहावन

ऊपर छत्र फिरे

सिंह की सवारी सोहे

कर में खड़ग धरे ॥

ॐ जय श्री जीण मइया

बाजत नौबत द्वारे

अरु मृदंग डैरु

चौंसठ जोगन नाचत

नृत्य करे भैरू ॥

ॐ जय श्री जीण मइया

बड़े बड़े बलशाली

तेरा ध्यान धरे

ऋषि मुनि नर देवा

चरणों आन पड़े ॥

ॐ जय श्री जीण मइया

जीण माता की आरती

जो कोई जन गावे

कहत संतो की वाणी सेवक

सुख सम्पत्ति पावे ॥

ॐ जय श्री जीण मइया

ॐ जय श्री जीण मइया

बोलो जय श्री जीण मइया

सच्चे मन से सुमिरे

सब दुःख दूर भया ॥

ॐ जय श्री जीण मइया

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।