जरी की पगड़ी बांधे, सुंदर आँखों वाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

कानों में कुण्डल साजे,

सिर मोर मुकुट विराजे,

सखियाँ पगली होती,

जब जब होठों पे बंसी बाजे,

हैं चंदा यह सांवरा,

तारे हैं ग्वाल बाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

लट घुंघराले बाल,

तेरे कारे कारे गाल,

सुन्दर श्याम सलोना,

तेरी टेढ़ी मेढ़ी चाल,

हवा में सर सर करता,

तेरा पीताम्बर मतवाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

मुख पे माखन मलता,

तू बल घुटने के चलता,

देख यशोदा भाग्य को,

देवों का मन भी जलता,

माथे पे तिलक है सोहे,

आँखों में काजल डारा,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

तू जब बंसी बजाए,

तब मोर भी नाच दिखाए,

यमुना में लहरें उठती,

और कोयल कू कू गाए,

हाथ में कँगन पहने,

और गल वैजंती माला

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

॥ दोहा ॥

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।