जन्मे जन्मे कृष्ण कन्हाई, बधाई दे दे री मैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जन्मे जन्मे कृष्ण कन्हाई,

बधाई दे दे री मैया,

दे दे री मैया,

बधाई दे दे री मैया,

जन्में जन्में कृष्ण कन्हाई,

बधाई दे दे री मैया ॥

ब्रम्हा आए विष्णु आए,

आए श्री महेश,

रिद्धि सिद्धि लेकर आए,

आए श्री गणेश,

जन्में जन्में कृष्ण कन्हाई,

बधाई दे दे री मैया ॥

लक्ष्मी आई शारदा आई,

आई गौरा मैया,

तेरे लला की नज़र की उतारे,

ले रही मात बलैया,

जन्में जन्में कृष्ण कन्हाई,

बधाई दे दे री मैया ॥

सारे नगर में धूम मची है,

बजे ढोल शहनाई,

नन्द बाबा गोकुल घर घर में,

बांटे आज मिठाई,

जन्में जन्में कृष्ण कन्हाई,

बधाई दे दे री मैया ॥

पाप मिटाने इस धरती पर,

तारणहार है आए,

लिखता है ‘लोकेश प्रजापति’,

‘भावना’ भाव से गाए,

जन्में जन्में कृष्ण कन्हाई,

बधाई दे दे री मैया ॥

जन्मे जन्मे कृष्ण कन्हाई,

बधाई दे दे री मैया,

दे दे री मैया,

बधाई दे दे री मैया,

जन्में जन्में कृष्ण कन्हाई,

॥ दोहा ॥

बधाई दे दे री मैया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।