जयकारा, मेरे केदारेश्वराय जय कारा

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्,

सदावसन्तं हृदयारविन्दे,

भवं भवानीसहितं नमामि ॥

जयकारा बोलो जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय तेरा जयकारा,

जयकारा बोलो जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय तेरा जयकारा ॥

जयकारा, बोलो जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा,

बोलो जयकारा, बोलो जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा ॥

आरती की जय, मेरे भोलेनाथ की,

मेरे भोलेनाथ की, मेरे शंभुनाथ की,

चुन-चुन कलियों से मैं हार बनाऊँ,

हार अपने भोलेनाथ को मैं पहनाऊँ,

अखंड ज्योति भोले तेरे क़दमों में चढ़ाऊँ,

क़दमों में चढ़ाके तेरी आरती मैं गाऊँ,

आजाओ भोले आजाओ,

हमें दर्शन देके चाहे चले जाओ,

आजाओ भोले आजाओ,

हमें दर्शन देके चाहे चले जाओ,

जयकारा, बोलो जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा,

बोलो जयकारा, बोलो जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा ॥

जयकारा जयकारा, बोलो जयकारा,

भोलेनाथ का बोलो, जयकारा,

जयकारा जयकारा, बोलो जयकारा,

भोलेनाथ का बोलो, जयकारा ॥

एकानन चतुरानन पंचनान राजे,

हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे,

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे,

सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे,

काल भी उसका क्या बिगाड़े महाकाल,

काल भी उसका क्या बिगाड़े महाकाल,

जिसके सर पे तेरा हाथ रहे सर्वदा,

जयकारा, बोलो जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा,

बोलो जयकारा, बोलो जयकारा,

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा,

॥ दोहा ॥

मेरे केदारेश्वराय, तेरा जयकारा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।