जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल, जय यमुना श्रीनाथ जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल,

जय यमुना श्रीनाथ जी ।

कलियुग का तो जीव उद्धार्या,

मस्तक धरिया हाथ जी ॥

मोर मुकुट और काने कुण्डल,

उर वैजयन्ती माला जी ।

नासिका गज मोती सोहे,

ए छबि जोवा जइये जी ॥

आसपास तो गऊ बिराजे,

गवाल मण्डली साथे जी ।

मुख थी व्हालो वेणु बजावे,

ए छबि जोवा जइये जी ॥

वल्लभ दुर्लभ जग में गाये,

तो भवसागर तर जायें जी ।

माधवदास तो इतना मांगें,

जन्म गोकुल में पाएं जी ॥

जय श्री गिरिधर, जय श्री गोविन्द,

जय श्री बालकृष्ण जी ।

जय श्री गोकुलपते, जय श्री रघुपति,

जय श्री यदुपति, जय श्री घनश्याम जी ॥

श्री गोकुलवारे नाथ जी,

मेरी डोर तुम्हारे नाथ जी ।

जय यमुना श्री गोवर्धन नाथ,

महाप्रभु श्री विट्ठलनाथ ॥

जय जय श्री गोकुलेश,

शेष ना रहे क्लेश ।

श्री वल्लभ जुग जुग राज करो,

श्री विट्ठल जुग जुग राज करो ।

श्री वल्लभ विट्ठल गोपीनाथ,

देवकी नन्दन श्री रघुनाथ ।

श्री यशोदानन्दन नन्दकिशोर,

श्री मुरलीधर माखनचोर ।

सूरदास कृष्णदास जी,

परमानन्ददास कुंभन दास जी ।

चतुर्भुज नन्ददास जी,

छीतस्वामी शी गोविन्द जी ।

श्री वल्लभ देव की जय,

प्राणप्यारे की जय ।

श्री गोवर्धन नाथ की जय,

चौरासी वैष्णव की जय ।

दो सौ बावन भगवदीयन की जय,

अष्टसखान की जय ।

समस्त वल्लभकुल की जय,

समस्त वैष्णवन की जय ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।