जय सरस्वती माता (माँ सरस्वती की आरती)

पारंपरिक स्तुति
माता सरस्वती आरती आरती सरस्वती
॥ दोहा ॥

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय सरस्वती माता...

॥ चौपाई ॥

चंद्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ ॐ जय सरस्वती माता...

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ ॐ जय सरस्वती माता...

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान तिमिर का, जग से नाश करो॥ ॐ जय सरस्वती माता...

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानदान दे माता, जग उद्धार करो॥ ॐ जय सरस्वती माता...

॥ दोहा ॥

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान परम पावे॥ ॐ जय सरस्वती माता...

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

विद्या और विवेक प्रदायिनी माँ भारती की आरती जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का आलोक बिखेरती है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।