॥ दोहा ॥
राधा नाम भजो रे मन, मिटे जनम के क्लेश।
बरसाने की वंदना, गावे नित्य इंद्रेश॥
॥ चौपाई ॥
जय जय श्री राधे बरसाने वारी।
कीरति की दुलारी, वृषभानु की दुलारी॥
जय जय श्री राधे बरसाने वारी॥
गोपी ग्वाल सब शीश झुकावे।
कान्हा जिनकी मुरली बजावे॥
ब्रज मंडल की प्राण अधारी।
जय जय श्री राधे बरसाने वारी॥
बरसाने में महल सुहाना।
जहाँ है भक्तों का आना जाना॥
कृपा दृष्टि राखो महतारी।
जय जय श्री राधे बरसाने वारी॥
इंद्रेश कहे लाडली सुन लीजो।
चरण कमल में वास तनिक दीजो॥
जाऊं मैं तो बलिहारी।
जय जय श्री राधे बरसाने वारी॥
॥ दोहा ॥
बरसाने की महारानी, जय जय जय सुखधाम।
इंद्रेश गावे प्रेम से, पूर्ण हो सब काम॥