जय जय हे शनि राज देव: शनि देव भजन

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार ॥

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार ॥

नीलवर्ण की छवि तुम्हारी,

ग्रहमंडल का तू बलिहारी,

नीलवर्ण की छवि तुम्हारी,

ग्रहमंडल का तू बलिहारी,

तेरे चरण में शरणागत है देवलोक संसार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार ॥

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार ॥

उग्र मंगला माहा प्रतापी,

तामस मूर्ति तू माहा कोपि,

उग्र मंगला माहा प्रतापी,

तामस मूर्ति तू माहा कोपि,

तेजोमय तू सूर्य पुत्र है धन्य तेरा अवतार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार ॥

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार ॥

क्रोध तुम्हारा विनाशकारी,

दया कृपा हो तारणहारी,

क्रोध तुम्हारा विनाशकारी,

दया कृपा हो तारणहारी,

एक ही याचना एक ही प्रार्थना तू ही करे उद्धार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार ॥

SantoKiVani Lyrics

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार,

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार,

तू ही मेरी सुख शांति है तू ही मेरा आधार,

॥ दोहा ॥

जय जय हे शनि राज देव तेरी जय जय कार ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।