जय हो, जय हो महाकाल राजा

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जय हो जय हो महाकाल राजा,

तेरी किरपा की छाई है छाया ।

जय हो जय हो महाकाल राजा,

तेरी किरपा की छाई है छाया ।

हर तरफ तू ही तू है समाया,

धन्य तेरी है तेरी ही माया ।

जय हो जय हो महाकाल राजा,

तेरी किरपा की छाई है छाया ।

तुमने देवो को अमृत दिया है,

आपने खुद ही विष को पिया है ॥

देवताओं का मान बडाया,

सागरमंथन के विष से बचाया ॥

जय हो जय हो महाकाल राजा,

तेरी किरपा की छाई है छाया ॥

वरदानी हो भोले कैलाशी,

डमरू वाले है काशी के वासी ॥

गले सर्पो का हार सजाया,

सर भभुति का टीका लगाया ॥

जय हो जय हो महाकाल राजा,

तेरी किरपा की छाई है छाया ॥

भोले जिसने भी तुमको पुकारा,

तुमने उनको दिया है सहारा ॥

सारे भगतो का मान बड़ाया,

तेरे चरणो में शिवाजी आया ॥

जय हो जय हो महाकाल राजा,

तेरी किरपा की छाई है छाया ॥

Singer: Shivaji Patil

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।