जय भोले शंकर जय गंगाधारी

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जय भोले शंकर जय गंगाधारी,

देवो के देवा हे महादेवा,

भोले भंडारी चंदा के धारी,

भोले भंडारी त्रिनेत्र धारी,

देवो के देवा हे महादेवा,

जय भोलें शंकर जय गंगाधारी,

देवो के देवा हे महादेवा ॥

ऊँचे कैलाश पे डेरा है डाला,

अद्भुत अनुपम रूप निराला,

गंगा जल से खुश हो जाते,

जिसने शिवलिंग पर है डाला,

भक्तो की सारी विपदाएँ टाली,

भक्तो की सारी विपदाएँ टाली,

देवो के देवा हे महादेवा,

जय भोलें शंकर जय गंगाधारी,

देवो के देवा हे महादेवा ॥

असुरो को भी वर दे डाले,

शिव शंकर मेरे भोले भाले,

ब्रम्हा को वेद दिए रावण को लंका,

शिव शम्भु तेरे खेल निराले,

भर दी है जिसने झोली पसारी,

भर दी है जिसने झोली पसारी,

देवो के देवा हे महादेवा,

जय भोलें शंकर जय गंगाधारी,

देवो के देवा हे महादेवा ॥

पार्वती के संग विराजे,

गणपत कार्तिक गोद में साजे,

तेरी महिमा जग से निराली,

तीन लोक में डंका बाजे,

चरणों में झुकती श्रष्टि है सारी,

चरणों में झुकती श्रष्टि है सारी,

देवो के देवा हे महादेवा,

जय भोलें शंकर जय गंगाधारी,

देवो के देवा हे महादेवा ॥

जय भोले शंकर जय गंगाधारी,

देवो के देवा हे महादेवा,

भोले भंडारी चंदा के धारी,

भोले भंडारी त्रिनेत्र धारी,

देवो के देवा हे महादेवा,

जय भोलें शंकर जय गंगाधारी,

॥ दोहा ॥

देवो के देवा हे महादेवा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।