जय अम्बे बोल

संत सूरदास
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

फिल्म यह प्रेम मोल लिया का भजन अम्बे बोल मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। माँ दुर्गा के चरणों में समर्पित यह गीत श्रद्धा, विश्वास और भक्ति रस का सुंदर अहसास कराता है। आइए, संतो की वाणी के माध्यम से इस मधुर भजन के बोल पढ़ते हैं और माँ की आराधना में लीन होते हैं।

तारों की चुनरी और चंद्रमा का टीका..

माता का रूप लगे सूरज सरीखा..

माता का रूप लगे सूरज सरीखा..

ऐ हालो!!

रातों की रात आई..

मन्नतें भी साथ लाई..

जय अम्बे! जय अम्बे!

बोल, बोल, बोल, बोल!

अपनों को पास लाई..

सपने भी साथ लाई..

जय अम्बे! जय अम्बे!

बोल, बोल, बोल, बोल!

ढोलीड़ा ढोल वगाड़ो..

गाजे करताल नगाड़ो..

माथे गरबी उपाड़ो रे..

माथे गरबी उपाड़ो रे..

ढोलीड़ा ढोल वगाड़ो..

गाजे करताल नगाड़ो..

माथे गरबी उपाड़ो रे..

माथे गरबी उपाड़ो रे..

छनके मन के मंजीरे..

ताली दिल ने बजाई..

जय अम्बे! जय अम्बे!

बोल, बोल, बोल, बोल!

रातों की रात आई..

मन्नतें भी साथ लाई..

जय अम्बे! जय अम्बे!

बोल, बोल, बोल, बोल!

साथ में आओ.. हालो रे हालो..

गरबा गाओ.. हालो रे हालो..

झूमते जाओ.. हालो रे हालो रे..

राती रे ओढ़नी.. ओढ़नी ना कोर थी..

राधा जी पोकारे.. कान- कुँवर ने..

आवे ना सान-भान.. कान-कुँवर ने..

जमना के नीर नहीं.. ना कोई कदंब रे..

प्रेम जहाँ बसता वहीं वृंदावन रे..

जमना के नीर नहीं.. ना कोई कदंब रे..

प्रेम जहाँ बसता वहीं वृंदावन रे..

बाँसुरी यह कान्हा की..

सुन के धुन यह कान्हा की..

तारिकाओं ने लिखे दो नाम..

तारिकाओं ने लिखे दो नाम..

प्रीत सदा कान्हा की..

जीत गई जाना की..

रीत यही राधा का श्याम..

रीत यही राधा का श्याम..

हमने जो आज़माई..

तक़दीरें जगमगाईं..

जय अम्बे! जय अम्बे!

बोल, बोल, बोल, बोल!

रातों की रात आई..

मन्नतें भी साथ लाई..

जय अम्बे! जय अम्बे!

बोल, बोल, बोल, बोल!

साथ में आओ.. हालो रे हालो..

गरबा गाओ.. हालो रे हालो..

झूमते जाओ.. हालो रे हालो रे..

साथ में आओ.. हालो रे हालो..

गरबा गाओ.. हालो रे हालो..

झूमते जाओ.. हालो रे हालो रे..

ऐ हालो!!

Song: Jai Ambe Bol – Yeh Prem Mol Liya

Music: Himesh Reshammiya

Lyrics: Mayur Puri

Singers: Himesh Reshammiya & Shreya Ghoshal

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।