जहाँ आसमां झुके जमीं पर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जहाँ आसमां झुके जमीं पर,

सर झुकता संसार का,

वही पे देखा हमने जलवा,

माँ तेरे दरबार का ॥

इक तिरकुट पर्वत प्यारा,

जहाँ पे भवन विशाल,

गुफा बनी एक सुन्दर सी,

बजे घंटे घड़ियाल,

स्वर्ग सा सुख वहां,

नहीं कोई दुःख वहां,

बराबर मिलता है सबको,

भिखारी हो या कोई राजा,

जहाँ आसमां झुके जमी पर,

सर झुकता संसार का,

वही पे देखा हमने जलवा,

माँ तेरे दरबार का ॥

पवन छेड़ती है यहाँ,

मधु सा मधुर संगीत,

जहां पे झरने गाते है,

प्रीत के प्यारे गीत,

दिल में रस घोलती,

वादियाँ बोलती,

नहीं धरती पे कही ऐसा,

नजारा हमने है पाया,

जहाँ आसमां झुके जमी पर,

सर झुकता संसार का,

वही पे देखा हमने जलवा,

माँ तेरे दरबार का ॥

वही पे ‘लख्खा’ हो गया,

निर्धन से धनवान,

धन दौलत शोहरत मिली,

और पाया सम्मान,

वही एक द्वार है,

सुख का संसार है,

मांगले बेधड़क दिल से,

भवानी बाँट रही सबको,

जहाँ आसमां झुके जमी पर,

सर झुकता संसार का,

वही पे देखा हमने जलवा,

माँ तेरे दरबार का ॥

जहाँ आसमां झुके जमीं पर,

सर झुकता संसार का,

वही पे देखा हमने जलवा,

माँ तेरे दरबार का ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।