जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ।

ये जीवन समर्पित, चरण में तुम्हारे,

तुम्ही मेरे सर्वस्व, तुम्ही प्राण प्यारे,

तुम्हे छोड़कर नाथ, किससे रहूँगा ।

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ॥

दयानाथ दयानिधि, मेरी अवस्था,

तेरे ही हाथो में, मेरी व्यवस्था,

कहना होगा जो भी, तुमसे रहूँगा ।

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ॥

ना कोई शिकायत, ना कोई अर्जी,

कहलो करालो, जो तेरी मर्जी,

सहाओगे जो भी, हंस के सहूँगा ।

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वही मैं रहूँगा ॥

जहाँ ले चलोगे, वही मैं चलूँगा,

जहाँ नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।