जागरण की रात मैया, जागरण में आओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जागरण की रात मैया,

जागरण में आओ,

माँ जागरण में आओ,

आस लगाए बैठे है माँ,

अब तो दरश दिखाओ,

जागरण की रात मईया,

जागरण में आओ,

माँ जागरण में आओं ॥

तेरे भक्तों ने मैया,

तेरी ज्योत जगाई,

तेरे लिए महामाई,

चुनरी लाल मंगाई,

पान सुपारी हलवा पूरी,

आके भोग लगाओ,

जागरण की रात मईया,

जागरण में आओ,

माँ जागरण में आओं ॥

तेरी शेर सवारी,

भक्तो के मन भाई,

दर्श बिना अब तेरे,

एक पल रहा ना जाए,

जल्दी से तुम आ जाओ माँ,

अब ना देर लगाओ,

जागरण की रात मईया,

जागरण में आओ,

माँ जागरण में आओं ॥

‘पासी केसरी’ मैया,

तेरी दिल से भेंट गाए,

जो भी दर पे आता,

झोली भर के जाए,

‘लाडी’ की भी मैया जी,

अब बिगड़ी बात बनाओ,

जागरण की रात मईया,

जागरण में आओ,

माँ जागरण में आओं ॥

जागरण की रात मैया,

जागरण में आओ,

माँ जागरण में आओ,

आस लगाए बैठे है माँ,

अब तो दरश दिखाओ,

जागरण की रात मईया,

जागरण में आओ,

माँ जागरण में आओं ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।