जगदाती पहाड़ों वाली माँ, मेरी बिगड़ी बनाने आ जाओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Devi Maan Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जगदाती पहाड़ों वाली माँ,

मेरी बिगड़ी बनाने आ जाओ,

मेरा और सहारा कोई ना,

मेरी लाज बचाने आ जाओ,

जगदाती पहाड़ों वाली माँ,

मेरी बिगड़ी बनाने आ जाओ ॥

मैं निर्बल निर्धन दिन बड़ा,

मैं घिर गया गम के घेरों में,

मां ज्योति रुपा भय हरनी,

कहीं डूब ना जाऊं अंधेरों में,

कमजोर हूं मैं मैया,

मेरी चिंता मिटाने आजाओ,

मेरी चिंता मिटाने आजाओ,

जग दाती पहाड़ो वाली मां,

मेरी बिगड़ी बनाने आ जाओ ॥

तेरे भरे हुए भंडार है माँ,

मोहताज मैं दाने दाने का,

तेरे होते हुए दिल कांप रहा,

तेरे द्वार के इस दीवाने का,

मेरी नाव भंवर में फंसी,

इसे पार लगाने आ जाओ,

इसे पार लगाने आ जाओ,

जग दाती पहाड़ो वाली मां,

मेरी बिगड़ी बनाने आ जाओ ॥

कहीं एक गरीब की कुटिया ना,

लोगों की नजर से गिर जाए,

विश्वास के रंगों पर मैया,

कहीं पानी ही ना फिर जाए,

क्या करूं कुछ सूझे ना,

मुझे रास्ता दिखाने आ जाओ,

मुझे रास्ता दिखाने आ जाओ,

जग दाती पहाड़ो वाली मां,

मेरी बिगड़ी बनाने आ जाओ ॥

जगदाती पहाड़ों वाली माँ,

मेरी बिगड़ी बनाने आ जाओ,

मेरा और सहारा कोई ना,

मेरी लाज बचाने आ जाओ,

जगदाती पहाड़ो वाली मां,

मेरी बिगड़ी बनाने आ जाओ ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।