मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Jagdamba Saraswati Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: जगदम्बा सरस्वती

अन्य नाम - मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती, राधे, मम्मा

गुरु - ब्रम्हा बाबा दादा लेखराज

शिष्य - दादी जानकी

आराध्य - भगवान विष्णु

जन्म – 1920

जन्म स्थान - अमृतसर, पंजाब, ब्रिटिश भारत

वैवाहिक अवस्था - अविवाहित

भाषा - सिंधी, अंग्रेजी, पंजाबी, गुजराती

माँ - रोचा

पिता - पोकरदास

प्रसिद्ध - ब्रह्माकुमारीज़ के पूर्व प्रशासनिक प्रमुख

मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक नेता थीं। सरस्वती मम्मा के नाम से प्रसिद्ध मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती, ब्रह्मा कुमारीज़ संगठन (1950-65) की पहली प्रशासनिक प्रमुख भी थीं।

मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती, दादा लेखराज के गीता के श्लोकों में सार को विस्तार से बहुत प्रभावित हुई थी। अपनी माँ और मौसी के जीवन में परिवर्तन का चमत्कार देखकर, राधे उनके साथ गीता सत्संग में जाने लगी। मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती की रुचि गुड़िया से हटकर प्रेम और शांति की परी बनने में बदल गई। मातेश्वरी को प्रजापिता ब्रह्मा (दादा लेखराज) में दिव्य उपस्थिति का एहसास हुआ। जब ब्रह्मा बाबा "मुरली" बजाते थे तो वह मदहोश हो जाती थी।

मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का व्यक्तित्व अत्यंत सशक्त था। उनकी बातों में जादुई शक्ति थी, उनकी शब्दों ने कई लोगों के जीवन को बदल दिया और उन्हें महान बनने के लिए प्रेरित किया। मातेश्वरी सेवा की प्रतिमूर्ति थीं। उन्हें "यज्ञ" (संस्था) के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी। वह आध्यात्मिक बच्चों की हर ज़रूरत का ख्याल रखती थीं और अपनी आखिरी सांस तक उनकी सेवा में थीं। 24 जून, 1965 को उन्होंने अपना नश्वर शरीर त्याग दिया, जिसे अब ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा माँ के मधुर स्मरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती | Mateshwari Jagadamba Saraswati

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।