जगन्नाथ स्वामी प्रभु नीलांचल के नाथ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Neelachal Ke Nath Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जगन्नाथ स्वामी प्रभु नीलांचल के नाथ,

सुन लो पुकार प्रभु नीलांचल के नाथ॥

चका नैन छवि है प्यारी,

जा पर जाऊँ मैं बलिहारी।

दर्शन दो एक बार,

प्रभु नीलांचल के नाथ॥

संतो की वाणी लिरिक्स

नीलाचल की राह दिखा दो,

अपने दर की धूल बना दो।

रख लो प्रभु अपने साथ,

प्रभु नीलांचल के नाथ॥

पतित पावन नाम तुम्हारा,

तू ही मेरा एक सहारा।

राम श्याम का थामो हाथ,

॥ दोहा ॥

प्रभु नीलांचल के नाथ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

जगन्नाथ स्वामी प्रभु नीलांचल के नाथ, सुन लो पुकार प्रभु नीलांचल के नाथ॥ Jagannath Swami Prabhu Nilanchal Ke Nath, Sun Lo Pukar Prabhu Nilanchal Ke Nath॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।