जग के पालनहार बोलो जय जय जय जगन्नाथ

पारंपरिक
अन्य भजन Bhajan Jagannath Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जगन्नाथ स्वामी हैं अंतर्यामी हैं

जग के पालन हार

बोलो जय जय जय जगन्नाथ

नीलांचल पर्वत पर तेरा सुंदर सा दरबार

जो भी देखे तेरी छवि को हो जाए बलिहार

डरपे बुलाता हे संकट मिटाता है सबके बारंबार

बोलो जय जय जय जगन्नाथ

संतो की वाणी लिरिक्स

रूप निराला सबसे प्यारा चका नैन हैं प्यारे

एक बार जो दर्शन करले मिट जायें दुख सारे

हम भी पुकारे ओर तुम भी पुकारो सब नाम को बारंबार

बोलो जय जय जय जगन्नाथ...

रथ की शोभा कितनी न्यारी देखे दुनिया सारी

तेरे संग बलभद्र बिराजे और सुभद्रा प्यारी

डरपे बुलाता हे संकट मिटाता है सबके बारंबार

बोलो जय जय जय जगन्नाथ

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

जगन्नाथ स्वामी हैं अंतर्यामी हैं, जग के पालन हार, बोलो जय जय जय जगन्नाथ... Jagannath Swami Hain Antaryami Hain, Jag Ke Palan Har, Bolo Jai Jai Jai Jagannath...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।