॥ दोहा ॥
जब जब विपदा आन पड़ी, दौड़े आए श्याम।
सच्चे दिल से जो जपे, खाटू वाले का नाम॥
॥ चौपाई ॥
जब जब मुझको श्याम तेरी दरकार पड़ी।
दौड़ी आई मेरे घर पे तेरी रहमत बड़ी॥
जब जब मुझको श्याम तेरी दरकार पड़ी॥
मुझको अकेला देख के जब, हँसती थी दुनिया सारी।
तूने आकर थाम लिया हाथ, ओ बाँके बिहारी॥
आँखों के आँसू पोंछे, खुशियों की झड़ी लगी।
जब जब मुझको श्याम तेरी दरकार पड़ी॥
रिश्ते नाते सब झूठे, बस तू ही सच्चा यार।
कन्हैया मित्तल शीश झुकाए, करता जय जयकार॥
॥ दोहा ॥
मोर मुकुट बंसी वाले, संकट हरण दयाल।
कन्हैया मित्तल गावती, राखो सदा निहाल॥