॥ दोहा ॥
हारे का तू है सहारा, सांवरे सरकार।
जो भी आया द्वार पे, पाया तेरा प्यार॥
॥ चौपाई ॥
जब जब भी इसे पुकारा है, मेरे श्याम ने दिया सहारा है।
गिरा जब भी मैं मझधारों में, इसने ही पार उतारा है॥
दुनिया ने मुझे ठुकराया था, अपनों ने मुंह को मोड़ा था।
तब बांके बिहारी ने आकर, मेरा हाथ थाम कर जोड़ा था॥
तेरी कृपा का क्या कहना, तू भक्तों का रखवाला है।
जब जब भी इसे पुकारा है, मेरे श्याम ने दिया सहारा है॥
॥ दोहा ॥
सांवरा सलोना कन्हैया मेरा, सबका तारणहार।
साध्वी पूर्णिमा की विनती, सुनियो नन्दकुमार॥