जब भक्त बुलाते हैँ हरि दौड़ के आते हैँ

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Hari Bhajan
॥ दोहा ॥

जब भक्त बुलाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ ॥

॥ चौपाई ॥

वो तो दीन और दुःखीओं को ॥

आ के गले लगाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,

जब भक्त बुलाते हैँ...

द्रोपदी ने जब, उन्हें पुकारा, दौड़े दौड़े आ गए ।

भरी सभा में, चीर बढ़ा के, उसकी लाज बचा गए ॥

वो बहुत दयालु हैँ, वो दया के सागर हैँ,

वो चीर बढ़ाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,

जब भक्त बुलाते हैँ...

अर्जुन ने जब, उन्हें पुकारा, सार्थी बनके आ गए ।

गीता का, उपदेश सुना के, उसका भरम मिटा गए ॥

वो ज्ञान सिखाते हैँ, वो भरम मिटाते हैँ,

वो गले लगाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,

जब भक्त बुलाते हैँ...

धन्ने ने जब, उन्हें पुकारा, ठाकुर बनके आ गए ।

पत्थरों में, दर्श दिखा के, प्रेम का भोग लगा गए ॥

वो दर्श दिखाते हैँ, वो हल चलाते हैँ,

वो मान बढ़ाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,

जब भक्त बुलाते हैँ...

मित्र सुद्दामा, द्वारे आए, दौड़े दौड़े आ गए ।

दो मुठी, सत्तू के बदले, उसका महल बना गए ॥

वो फ़र्ज़ निभाते हैँ, वो गले लगाते हैँ,

वो महल बनाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,

जब भक्त बुलाते हैँ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।