इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे,

थाम के हाथ अब ना छुड़ा लेना तुम,

जैसे अब तक निभाई है तुमने प्रभु,

जैसे अब तक निभाई है तुमने प्रभु,

वैसे ही आगे और निभा लेना तुम,

इतनी विनती हैं तुमसे हे भोले मेरे,

थाम के हाथ अब ना छुड़ा लेना तुम,

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे ॥

अच्छा हूँ बुरा हूँ खोटा हूँ खरा,

जैसा भी हूँ हे शम्भू मैं बस हूँ तेरा,

जो भी देनी हो दे देना मुझको सजा,

जो भी देनी हो दे देना मुझको सजा,

अपनी नजरो से मत ना गिरा देना तुम,

इतनी विनती हैं तुमसे हे भोले मेरे,

थाम के हाथ अब ना छुड़ा लेना तुम,

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे ॥

ऐसी सुबह न हो ना कोई शाम हो,

मेरे होंठो पे जब ना तेरा नाम हो,

जिस घडी तेरे चरणों का ना ध्यान हो,

जिस घडी तेरे चरणों का ना ध्यान हो,

उसके पहले ही मुझको उठा लेना तुम,

इतनी विनती हैं तुमसे हे भोले मेरे,

थाम के हाथ अब ना छुड़ा लेना तुम,

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे ॥

आज जो भी है बस वो दिया आपने,

मेरी हस्ती है क्या सब किया आपने,

हाथ फैले किसी ओर के सामने,

हाथ फैले किसी ओर के सामने,

जिंदगी में वो दिन ना दिखा देना तुम,

इतनी विनती हैं तुमसे हे भोले मेरे,

थाम के हाथ अब ना छुड़ा लेना तुम,

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे ॥

जोड़ के हाथ ये ही है अर्जी मेरी,

इससे आगे मेरे नाथ मर्जी तेरी,

जब भी आए जीवन की घडी आखरी,

जब भी आए जीवन की घडी आखरी,

उस घडी बस मुझे मत भुला देना तुम,

इतनी विनती हैं तुमसे हे भोले मेरे,

थाम के हाथ अब ना छुड़ा लेना तुम,

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे ॥

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे,

थाम के हाथ अब ना छुड़ा लेना तुम,

जैसे अब तक निभाई है तुमने प्रभु,

जैसे अब तक निभाई है तुमने प्रभु,

वैसे ही आगे और निभा लेना तुम,

इतनी विनती हैं तुमसे हे भोले मेरे,

थाम के हाथ अब ना छुड़ा लेना तुम,

इतनी विनती है तुमसे हे भोले मेरे ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।