इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले

संत तुलसीदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

इतना तो करना स्वामी,

जब प्राण तन से निकले

गोविन्द नाम लेकर,

फिर प्राण तन से निकले ॥

श्री गंगा जी का तट हो,

यमुना का वंशीवट हो,

मेरा सांवरा निकट हो,

जब प्राण तन से निकले,

इतना तों करना स्वामी जब प्राण ॥

पीताम्बरी कसी हो,

छवि मन में यह बसी हो,

होठों पे कुछ हसी हो,

जब प्राण तन से निकले,

इतना तों करना स्वामी जब प्राण ॥

श्री वृन्दावन का स्थल हो,

मेरे मुख में तुलसी दल हो,

विष्णु चरण का जल हो,

जब प्राण तन से निकले,

इतना तों करना स्वामी जब प्राण ॥

जब कंठ प्राण आवे,

कोई रोग ना सतावे,

यम दर्शना दिखावे,

जब प्राण तन से निकले,

इतना तो करना स्वामि जब प्राण ॥

उस वक़्त जल्दी आना

नहीं श्याम भूल जाना

राधा को साथ लाना

जब प्राण तन से निकले

इतना तों करना स्वामि जब प्राण ॥

सुधि होवे नाही तन की,

तैयारी हो गमन की,

लकड़ी हो ब्रज के वन की,

जब प्राण तन से निकले,

इतना तो करना स्वामि जब प्राण ॥

एक भक्त की है अर्जी,

खुदगर्ज की है गरजी,

आगे तुम्हारी मर्जी,

जब प्राण तन से निकले,

इतना तो करना स्वामि जब प्राण ॥

ये नेक सी अरज है,

मानो तो क्या हरज है,

कुछ आप का फरज है,

जब प्राण तन से निकले,

इतना तो करना स्वामी जब प्राण ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।