ईश्वर से सम्पर्क करने का नम्बर - प्रेरक कहानी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

एक पुजारी और नाई दोनों मित्र थे। एक बार नाई पुजारी से कहता है - ईश्वर ऐसा क्यों करता है? वैसा क्यों करता है? यहाँ बाढ़ आ गई, वहाँ सूखा हो गया, यहाँ दुर्घटना हुई, यहाँ भुखमरी चल रही है, नौकरी नहीं मिल रही। हमेशा ही लोगों को ऐसी बहुत सारी परेशानियां देता रहता है।

उस पुजारी ने उसे एक आदमी से मिलाया जो भिखारी था, बाल बहुत बड़े थे, दाढ़ी भी बहुत बड़ी थी।

उसने नाईं को कहा- देखो इस इंसान को, जिसके बाल बड़े-बड़े हैं, दाढ़ी भी बहुत बढ़ गयी है। तुम नाई हो, तुम्हारे होते हुए ऐसा क्यों है?

नाई बोला- अरे उसने मेरे से संपर्क ही नहीं किया।

पुजारी ने कहा- यही तो बात है जो लोग ईश्वर से संपर्क करते हैं, उनका दुःख हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। और जो लोग संपर्क ही नहीं करते वे दुःखी रहते हैं, और कहते हैं कि हम दुःखी हैं। जो संपर्क करेगा, वही तो दुःख से मुक्ति पायेगा।

ईश्वर से सम्पर्क करने का नम्बर कुछ ऐसे है। प्रतिदिन इस नंबर को डायल करें

अहम् से शून्य होजाओ, शून्यता में चले जाओ, अपने-आप को भी शून्य में मिला दो।

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सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

एक पुजारी और नाई दोनों मित्र थे। एक बार नाई पुजारी से कहता है - ईश्वर ऐसा क्यों करता है? वैसा क्यों करता है? | ईश्वर से सम्पर्क करने का नम्बर, Number To Contact GOD

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।