इंद्रेश उपाध्याय जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Indresh Upadhyay Ji Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमालः श्री इंद्रेश उपाध्याय जी

गुरु - श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री

आराध्य - श्री कृष्णा

जन्म - 7 अगस्त 1997

जन्म स्थान - वृन्दावन, उत्तर प्रदेश

वैवाहिक स्थिति - विवाहित

पिता - श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री

भाषा - हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी

सुप्रसिद्ध - आध्यात्मिक संत, धर्म वक्ता, भक्ति गायक

इन्द्रेश उपाध्याय जी बहुत ही उज्ज्वल और प्रसिद्ध कथा वाचक हैं। उनकी मधुर वाणी को सुनकर हर कोई भक्ति में सराबोर हो जाता है। इंद्रेश उपाध्याय ने श्रीमद्भागवत के दिव्य ग्रंथ का अध्ययन किया है और मानवता के शाश्वत लाभ के लिए इस पवित्र ग्रंथ की महिमा का पाठ किया है।

उनका जन्म साधु संतों के दिव्य परिवार में हुआ था, उपाध्याय जी के इस परिवार में असंख्य दिव्य आत्माएं पैदा हुई हैं जिन्हें संस्कृत भाषा और श्रीमद्भागवत पुराण का विशेष ज्ञान है।

इंद्रेश जी माता-पिता के सेवा धर्म को दैनिक जीवन में गौ सेवा और पूजा के साथ-साथ बड़ी लगन से निभाते हैं। वह हमेशा आपको माता का उपदेश देते हैं और उनकी सेवा के कार्य में आगे बढ़ते हैं। उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह गौ सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। वह अपने श्रोताओं के दिलों में "वृंदावन" बनाने और गौ माता की महिमा फैलाने के मिशन के लिए तत्पर हैं। उनके गाये हुए भजन बहुत प्रसिद्ध हैं।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

इंद्रेश उपाध्याय जी | Indresh Upadhyay Ji

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।