इंदौर से चल कर आया हूँ, मेरे बाबा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

इंदौर से चल कर आया हूँ,

मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए,

एक फूल गुलाब का लाया हूँ,

चरणों में तेरे अर्पण के लिए ॥

ना रोली मोली चावल है,

ना धन दौलत की थैली है,

ना धन दौलत की थैली है,

दो आंसू बचा कर लाया हूँ,

पूजा तेरी करने के लिए,

एक फूल गुलाब का लाया हूँ,

चरणों में तेरे अर्पण के लिए ॥

ना रंग महल की अभिलाषा,

ना इच्छा सोने चांदी की,

ना इच्छा सोने चांदी की,

तेरी दया की दौलत काफी है,

झोली मेरी भरने के लिए,

एक फूल गुलाब का लाया हूँ,

चरणों में तेरे अर्पण के लिए ॥

बाबा मेरी इच्छा नही,

अब यहां से वापस जाने की,

अब यहां से वापस जाने की,

चरणों में जगह दे दो थोड़ी,

मुझे जीवन भर रहने के लिए,

एक फूल गुलाब का लाया हूँ,

चरणों में तेरे अर्पण के लिए ॥

इंदौर से चल कर आया हूँ,

मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए,

एक फूल गुलाब का लाया हूँ,

॥ दोहा ॥

चरणों में तेरे अर्पण के लिए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।