हम तुम्हारे थे प्रभु जी हम तुम्हारे हैं

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

तुम ही हो माता पिता हमारे, तुम ही हो बंधु सखा हमारे।
प्रभु जी तुम्हारे चरणन की छाया, जीवन धन्य करे हमारे॥

॥ चौपाई ॥

हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं।
हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रियतम॥

तूने दिया ये जीवन हमको, तूने दिया संसार।
तेरे नाम पे न्योछावर है, मेरा तन मन प्यार॥

कभी न छोड़ना हाथ हमारा, हे गिरधर गोपाल।
हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं॥

॥ दोहा ॥

प्रभु चरनन की प्रीति ही, जीवन को आधार।
साध्वी पूर्णिमा विनवे, नमो नमो करतार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ईश्वर के प्रति आत्मा का शाश्वत संबंध और समर्पण व्यक्त करने वाला यह प्रार्थना भजन साधक को प्रभु का अनन्य बना देता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।