हम तुम्हारे थे प्रभु जी हम तुम्हारे हैं हम तुम्हारे ही रहेंगे ओ मेरे प्रीतम

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

जन्म जन्म का साथ है, तुमसे हे भगवान।
देवी चित्रलेखा गावती, राखहु मेरो मान॥

॥ चौपाई ॥

हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं।
हम तुम्हारे ही रहेंगे, ओ मेरे प्रीतम॥
हम तुम्हारे थे प्रभु जी॥

तुमने ही तो रूप दिया है, तुमने प्राण संवारे।
जन्म जन्म की इस नैया के, तुम ही हो रखवारे॥
तेरे सिवा कोई ना हमारा, ओ मेरे प्रीतम।
हम तुम्हारे थे प्रभु जी॥

लाख छुड़ाए दुनिया हमसे, प्रीत तुम्हारी सांची।
चरण कमल में तेरे आकर, मन की वीणा नाची॥
हृदय में बसते हो तुम सांवरिया, ओ मेरे प्रीतम।
हम तुम्हारे थे प्रभु जी॥

देवी चित्रलेखा कहे हाथ जोड़कर, लाज हमारी रखना।
अपने प्रेम की शीतल छाया, सदा ही सिर पर रखना॥
भक्ति की इस पावन ज्योति को, बुझने ना देना प्रीतम।
हम तुम्हारे थे प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं॥

॥ दोहा ॥

प्रीतम प्यारे कृष्ण प्रभु, दीनबंधु सुख धाम।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, जय जय आत्माराम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रभु श्री कृष्ण के प्रति अनन्य, शाश्वत और अखंड समर्पण का अमर भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।