हम तेरे नादान से बालक

पारंपरिक
हनुमान जी भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हम तेरे नादान से बालक,

तुम दया के सागर हो,

एक एक बूंद में तेरे अमृत,

हमको जान से प्यारा है,

हम तेरें नादान से बालक ॥

यह जीवन है तेरी अमानत,

इसको अपना ही माना,

जब तक तेरी शरण ना आयी,

अपना इसको ना जाना,

तुम हो जग के पालनहारे,

मेरा भी कुछ ध्यान करो,

हम तेरें नादान से बालक ॥

दुनिया तेरे दर पर मांगे,

खाली दामन फैलाकर,

हाथ पकड़ लो बाबा मेरा,

ठोकर खाई हूं दर दर,

तुम मेरे बन जाओ बाबा,

चरणों में यह अर्जी है,

हम तेरें नादान से बालक ॥

तेरी राहों में बालाजी,

पलके आज बिछाई है,

तेरे होते दुख पाउँ मैं,

क्या यह तेरी मर्जी है,

आके तेरे दर पर मैंने,

यह अरदास लगाई है,

हम तेरें नादान से बालक ॥

हम तेरे नादान से बालक,

तुम दया के सागर हो,

एक एक बूंद में तेरे अमृत,

हमको जान से प्यारा है,

॥ दोहा ॥

हम तेरें नादान से बालक ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।