हो जो नजरे करम आपकी

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हो जो नजरे करम आपकी,

फिर नहीं डर है संसार की,

एक नजर दास पर हो कभी,

एक नजर दास पर हो कभी,

फिर नहीं डर है संसार की,

हो जो नजरें करम आपकी ॥

कोई दाता है तुझसा नहीं,

दिन मुझसा है कोई नहीं,

अब तो तेरे सिवा इस जहाँ में,

है किसी पर भरोसा नही,

तेरे हाथों में है जिन्दगी,

फिर नहीं डर है संसार की,

हो जो नजरें करम आपकी ॥

चाहे कितना भी करके जतन,

कोई भी साथ जाता नहीं,

मौत जब सामने होगी तेरे,

कोई भी रोक पाता नहीं,

गर हो सच्ची तेरी बंदगी,

फिर नहीं डर है संसार की,

हो जो नजरें करम आपकी ॥

कल पे बातों ना छोड़ो ‘फणि’,

कल पे कुछ जोर चलता नहीं,

वक्त से पहले किस्मत से ज्यादा,

माँगने पे भी मिलता नहीं,

है ये जीवन बड़ा कीमती,

फिर नहीं डर है संसार की,

हो जो नजरें करम आपकी ॥

हो जो नजरे करम आपकी,

फिर नहीं डर है संसार की,

एक नजर दास पर हो कभी,

एक नजर दास पर हो कभी,

फिर नहीं डर है संसार की,

॥ दोहा ॥

हो जो नजरें करम आपकी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।