हे शिव शम्भू करुणा सिंधु

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे शिव शम्भू करुणा सिंधु,

जग के पालनहार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥

त्रिलोकी है नाम तुम्हारा,

त्रिलोकी है नाम तुम्हारा,

तेरी दया से जग से उजियारा,

तेरी दया से जग से उजियारा,

कण कण में है वास तुम्हारा,

कण कण में है वास तुम्हारा,

करुणा के भंडार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥

सारे जग के तुम हो स्वामी,

सारे जग के तुम हो स्वामी,

हे जगपालक अंतर्यामी,

हे जगपालक अंतर्यामी,

सियाराम का ध्यान धरे तू,

सियाराम का ध्यान धरे तू,

गिरिजा के भरतार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥

‘हर्ष’ कहूँ क्या तेरी माया,

‘हर्ष’ कहूँ क्या तेरी माया,

तूने ये ब्रम्हांड रचाया,

तूने ये ब्रम्हांड रचाया,

तेरे नाम से हम दीनो का,

तेरे नाम से हम दीनो का,

चलता है संसार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥

हे शिव शम्भू करुणा सिंधु,

जग के पालनहार,

दयालु वंदन बारम्बार,

॥ दोहा ॥

दयालु वंदन बारम्बार ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।