हे नाथ दया करके, मेरी बिगड़ी बना देना

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे नाथ दया करके,

मेरी बिगड़ी बना देना,

अब तक जो निभाया है,

आगे भी निभा देना,

आगे भी निभा देना,

हें नाथ दया करके,

मेरी बिगड़ी बना देना ॥

लाचार हूँ मैं भोले,

इस मन से हारा हूँ,

विश्वास यही है मुझे,

मैं तेरा प्यारा हूँ,

कभी टूटे ना ये रिश्ता,

ये ध्यान सदा रखना,

हें नाथ दया करके,

मेरी बिगड़ी बना देना,

मेरी बिगड़ी बना देन ॥

जप तप ना जानू मैं,

ना पूजा पाठ तेरा,

बस तेरी दया पर ही,

चलता है गुजर मेरा,

ये दया प्रभु तेरी,

हरदम रखते रहना,

हें नाथ दया करके,

मेरी बिगड़ी बना देना,

मेरी बिगड़ी बना देन ॥

मैं तेरे प्यार की,

छाया में रहूँ हरदम,

कभी आकर घेरे ना,

दुनिया का कोई भी गम,

तेरे नाम की मस्ती का,

बाबा जाम पिला देना,

हें नाथ दया करके,

मेरी बिगड़ी बना देना,

मेरी बिगड़ी बना देन ॥

मैं नाथ तुम्हे कहता,

तुम सर्वस्व हो मेरे,

‘सांवर’ बस तेरा है,

गुणगान करे तेरे,

मुझे अंत समय में तू,

तेरी गोद बिठा लेना,

हें नाथ दया करके,

मेरी बिगड़ी बना देना,

मेरी बिगड़ी बना देन ॥

हे नाथ दया करके,

मेरी बिगड़ी बना देना,

अब तक जो निभाया है,

आगे भी निभा देना,

आगे भी निभा देना,

हें नाथ दया करके,

॥ दोहा ॥

मेरी बिगड़ी बना देना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।