॥ दोहा ॥
गोपाल कृष्ण करुणा निधान, सब सुख सम्पति दाता।
मृदुल कृष्ण गावे आरती, जय जय जग के त्राता॥
॥ चौपाई ॥
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी।
हे नंदलाल करूँ आरती तेरी॥
तुझपे ओ कान्हा बलिहारी जाऊँ।
सांझ सवेरे तेरे गुण गाऊँ॥
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी॥
तुलसी दल प्रभु शीश चढ़ाऊँ।
माखन मिश्री का भोग लगाऊँ॥
मन मंदिर में जोत जगाऊँ।
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी॥
ग्वाल बाल संग गैया चरावे।
मधुर मधुर मुरली बजावे॥
गोपिन संग रास रचावे।
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी॥
मृदुल कृष्ण पर किरपा कीजो।
चरणन में प्रभु शरण दीजो॥
भव से पार कन्हैया लीजो।
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी॥
॥ दोहा ॥
आरती गावे जो नर नारी, पावे परम पद पावन।
मृदुल कृष्ण बलिहारी जावे, जय बांके मनभावन॥