हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

गोपाल कृष्ण करुणा निधान, सब सुख सम्पति दाता।
मृदुल कृष्ण गावे आरती, जय जय जग के त्राता॥

॥ चौपाई ॥

हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी।
हे नंदलाल करूँ आरती तेरी॥
तुझपे ओ कान्हा बलिहारी जाऊँ।
सांझ सवेरे तेरे गुण गाऊँ॥
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी॥

तुलसी दल प्रभु शीश चढ़ाऊँ।
माखन मिश्री का भोग लगाऊँ॥
मन मंदिर में जोत जगाऊँ।
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी॥

ग्वाल बाल संग गैया चरावे।
मधुर मधुर मुरली बजावे॥
गोपिन संग रास रचावे।
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी॥

मृदुल कृष्ण पर किरपा कीजो।
चरणन में प्रभु शरण दीजो॥
भव से पार कन्हैया लीजो।
हे गोपाल कृष्ण करूँ आरती तेरी॥

॥ दोहा ॥

आरती गावे जो नर नारी, पावे परम पद पावन।
मृदुल कृष्ण बलिहारी जावे, जय बांके मनभावन॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री गोपाल कृष्ण भगवान की प्रातः एवं सायं कालीन दीप आरती व स्तुति।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।