हे गौरी नंदन तुझको वंदन, तेरा रूप निराला

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे गौरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला,

गोरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला ॥

सिध्दि सदन गज वदन विनायक,

कृपा सिंधु सुंदर सब लायक,

ब्रम्हा विष्णु जपते निशदिन,

ब्रम्हा विष्णु जपते निशदिन,

तेरे नाम की माला,

हे गोरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला,

गोरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला ॥

मोदक प्रिय मुद मंगल दाता,

विद्या वारिधि बुद्धि विधाता,

कृपा करहु अब अंतर्यामी,

कृपा करहु अब अंतर्यामी,

गोरी सुत गणराजा,

हे गोरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला,

गोरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला ॥

चंदा ने तेरा रूप बनाया,

तारों ने गहना पहनाया,

सब ऋषियों ने नमन किया तुझे,

सब ऋषियों ने नमन किया तुझे,

भक्तों के प्रतिपाला,

हे गोरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला,

गोरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला ॥

हे गौरी नंदन तुझको वंदन,

तेरा रूप निराला,

गोरी नंदन तुझको वंदन,

॥ दोहा ॥

तेरा रूप निराला ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: हे गौरी नंदन तुझको वंदन, तेरा रूप निराला | Bhajan: Hey Gauri Nandan Tujh Ko Vandan Tera Roop Nirala Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।