हे गौरा के लाल मेरी सुनिए, तेरा भक्त खड़ा तेरे द्वार है

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे गौरा के लाल मेरी सुनिए,

तेरा भक्त खड़ा तेरे द्वार है,

कई जन्मों से बप्पा मैं भटका,

तेरे चरणों में अब मेरा संसार है,

हे गौरा के लाल मेरी सुनिये ॥

इस जग में मैं आके हूँ भटका,

चैन कही ना पाया है,

जबसे आया मैं तेरे दर पे,

दिल को सुकून अब आया है,

मोह माया ये दुनिया है सारी,

और माटी ये धन अम्बार है,

कई जन्मों से बप्पा मैं भटका,

तेरे चरणों में अब मेरा संसार है,

हे गौरा के लाल मेरी सुनिये ॥

सुख के है सब संगी साथी,

दुःख में काम ना आएँगे,

झूठे रिश्ते नाते है सारे,

ये क्या साथ निभाएँगे,

तेरा नाम है सबसे पावन,

तेरा नाम ही जग आधार है,

कई जन्मों से बप्पा मैं भटका,

तेरे चरणों में अब मेरा संसार है,

हे गौरा के लाल मेरी सुनिये ॥

माँ गौरा के लाल तू सुनले,

मैं फरियादी आया हूँ,

तेरी श्रध्दा तेरी भक्ति,

करने को मंदिर आया हूँ,

जो भी गौरा के लाल को ध्याये,

वो ही जाता तो भव से पार है,

कई जन्मों से बप्पा मैं भटका,

तेरे चरणों में अब मेरा संसार है,

हे गौरा के लाल मेरी सुनिये ॥

हे गौरा के लाल मेरी सुनिए,

तेरा भक्त खड़ा तेरे द्वार है,

कई जन्मों से बप्पा मैं भटका,

तेरे चरणों में अब मेरा संसार है,

॥ दोहा ॥

हे गौरा के लाल मेरी सुनिये ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: हे गौरा के लाल मेरी सुनिए, तेरा भक्त खड़ा तेरे द्वार है | Bhajan: Hey Gaura Ke Lal Meri Suniye Tera Bhakt Khada Tere Dwar Hai Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।