हरिहरात्मजा आश्रय अष्टकम

पारंपरिक
विष्णु भगवान मंत्र Mantra Hariharathmaja Ashraya Ashtakam Mantra
॥ पावन पाठ ॥

गिरिचरं करुणामृत सागरं

परिचरं परमं मृगयापरम् ।

सुरुचिरं सुचराचरगोचरं

हरिहरात्मजमीश्वरमाश्रये ॥ १ ॥

प्रणतसञ्चयचिन्तित कल्पकं

प्रणतमादिगुरुं सुरशिल्पकम् ।

प्रणवरञ्जित मञ्जुळतल्पकं

हरिहरात्मजमीश्वरमाश्रये ॥ २ ॥

अरिसरोरुहशंखगदाधरं

परिघमुद्गरबाणधनुर्धरम् ।

क्षुरिक तोमर शक्तिलसत्करं

हरिहरात्मजमीश्वरमाश्रये ॥ ३ ॥

विमलमानस सारसभास्करं

विपुलवेत्रधरं प्रयशस्करम् ।

विमतखण्डन चण्डधनुष्करं

हरिहरात्मजमीश्वरमाश्रये ॥ ४ ॥

सकललोक नमस्कृत पादुकं

सकृदुपासक सज्जनमोदकम् ।

सुकृतभक्तजनावन दीक्षकं

हरिहरात्मजमीश्वरमाश्रये ॥ ५ ॥

शरणकीर्तन भक्तपरायणं

चरणवारिधरात्मरसायनम् ।

वरकरात्तविभूति विभूषणं

हरिहरात्मजमीश्वरमाश्रये ॥ ६ ॥

मृगमदाङ्गित सत्तिलकोज्वलं

मृगगणाकलितं मृगयाकुलम् ।

मृगवरासनमद्भुत दर्शनं

हरिहरात्मजमीश्वरमाश्रये ॥ ७ ॥

गुरुवरं करुणामृत लोचनं

निरुपमं निखिलामयमोचनम् ।

पुरुसुखप्रदमात्मनिदर्शनं

हरिहरात्मजमीश्वरमाश्रये ॥ ८ ॥

॥ दोहा ॥

॥ जय श्रीमन्नारायण ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

हरिहरात्मजा आश्रय अष्टकम | Hariharathmaja Ashraya Ashtakam

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।