हरि सुंदर नंद मुकुंदा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

हरि केशव हरि गोविंद

हरि नारायण हरि ॐ

हरि केशव हरि गोविंद

हरि नारायण हरि ॐ

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

हरि केशव हरि गोविंद

हरि नारायण हरि ॐ

हरि केशव हरि गोविंद

हरि नारायण हरि ॐ

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

वन्माली मुरलीधारी

गोवर्धन गिरिवर्धारी

वन्माली मुरलीधारी

गोवर्धन गिरिवर्धारी

नित नित कर माखन चोरी

गोपी मन हारी

आओ रे गाओ रे गोकुल के प्यारे

आओ रे कान्हा रे गोकुल के प्यारे

आओ रे नाचो रे रास रचाओ रे

गाओ रे नाचो रे रास रचाओ रे

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

हरि केशव हरि गोविंद

हरि नारायण हरि ॐ

हरि केशव हरि गोविंद

हरि नारायण हरि ॐ

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

हे मोर मुकुट गिरधारी

कान्हा पीताम्भर धारी

हे मोर मुकुट गिरधारी

कान्हा पीताम्भर धारी

गोपियाँ संग रास रचाये

मोहन मुरली धारी

आओ रे आओ रे मोहन गिरधारी

आओ रे कान्हा रे हे कृष्णा मुरारी

आओ रे नाचो रे रास रचाओ रे

गाओ रे नाचो रे रास रचाओ रे

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

हरि केशव हरि गोविंद

हरि नारायण हरि ॐ

हरि केशव हरि गोविंद

हरि नारायण हरि ॐ

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

हरि सुंदर नंद मुकुंदा

हरि नारायण हरि ॐ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।