हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी: होली भजन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

कहाँ से आयो कुँवर कन्हैया

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

कहाँ से आयो कुँवर कन्हैया

कहाँ से आई राधा गोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

कहाँ से आयो कुँवर कन्हैया

मथुरा से आयो कुँवर कन्हैया

गोकुल से राधा गोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

कितने बरस को कुँवर कन्हैया

कितने बरस की राधा गोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

सात बरस को कुँवर कन्हैया

बारह बरस राधा गोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

काहे के दो खम्भ बने है

काहे की लागी डोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

अगर चन्दन को खम्भ बनो है

रेशम की लागी डोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

एक पर झूले कुँवर कन्हैया

दूजे पर राधा गोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

टूट गयो खम्भ लटक गई डोरी

रपट पड़ी राधा गोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी

जुड़ गयो खम्भ जुड़ाय गयी डोरी

हँसत चली राधा गोरी

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी,

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।