हरि नाम नहीं तो जीना क्या

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हरि नाम नहीं तो जीना क्या

अमृत है हरि नाम जगत में,

इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥

काल सदा अपने रस डोले,

ना जाने कब सर चढ़ बोले।

हर का नाम जपो निसवासर,

अगले समय पर समय ही ना ॥

हरि नाम नहीं तो जीना क्या

अमृत है हरि नाम जगत में,

इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥

भूषन से सब अंग सजावे,

रसना पर हरि नाम ना लावे।

देह पड़ी रह जावे यही पर,

फिर कुंडल और नगीना क्या ॥

हरि नाम नहीं तो जीना क्या

अमृत है हरि नाम जगत में,

इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥

तीरथ है हरि नाम तुम्हारा,

फिर क्यूँ फिरता मारा मारा।

अंत समय हरि नाम ना आवे,

फिर काशी और मदीना क्या ॥

हरि नाम नहीं तो जीना क्या

अमृत है हरि नाम जगत में,

इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥

हरि नाम नहीं तो जीना क्या

अमृत है हरि नाम जगत में,

॥ दोहा ॥

इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।