हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

कलिकाल दोष निधान है, एक नाम आधार।
देवी चित्रलेखा संकीर्तन, तारे सकल संसार॥

॥ चौपाई ॥

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

नाम संकीर्तन परम पुनीता, गावत वेद पुरान और गीता।
सकल मनोरथ पूरण होवे, जो हरि नाम हृदय संजोवे॥
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

राम नाम की महिमा भारी, शिव जी जपे त्रिपुरारी।
कृष्ण नाम अति पावन मीठा, ब्रज गोपी मन माहिं अनूठा॥
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

देवी चित्रलेखा गावे संकीर्तन, नाचे झूमे सब हरि जन।
कलयुग के भव बंधन काटे, पावे परमानंद निरंतर॥
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

॥ दोहा ॥

महामंत्र संकीर्तन, कलिमल हरण प्रकाश।
देवी चित्रलेखा शीश धरे, जय जय प्रभु अविनाश॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

कलयुग का तारक महामंत्र 'हरे राम हरे कृष्ण' का पूज्य देवी चित्रलेखा जी के कथा संकीर्तन स्वर में दिव्य गायन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।