॥ दोहा ॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
॥ चौपाई ॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
भावार्थ:
'हरे' शब्द भगवान की आह्लादिनी शक्ति (श्रीमती राधारानी) को संबोधित करता है, 'कृष्ण' सर्व-आकर्षक परमात्मा हैं, और 'राम' समस्त आनंद के परम स्रोत हैं।
यह महामंत्र कलिकाल के समस्त संतापों को हरने वाला और आत्मा को परमात्मा के प्रेम रस से जोड़ने वाला सर्वसिद्ध मंत्र है।
॥ दोहा ॥
इति षोडशकं नाम्नां कलिकल्मषनाशनम्।
नातः परतरोपायः सर्ववेदेषु दृश्यते॥