हरे कृष्ण महामंत्र

कलिसंतरणोपनिषद् / चैतन्य महाप्रभु
श्री कृष्ण मंत्र मंत्र कृष्ण
॥ दोहा ॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

॥ चौपाई ॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

भावार्थ:
'हरे' शब्द भगवान की आह्लादिनी शक्ति (श्रीमती राधारानी) को संबोधित करता है, 'कृष्ण' सर्व-आकर्षक परमात्मा हैं, और 'राम' समस्त आनंद के परम स्रोत हैं।

यह महामंत्र कलिकाल के समस्त संतापों को हरने वाला और आत्मा को परमात्मा के प्रेम रस से जोड़ने वाला सर्वसिद्ध मंत्र है।

॥ दोहा ॥

इति षोडशकं नाम्नां कलिकल्मषनाशनम्।
नातः परतरोपायः सर्ववेदेषु दृश्यते॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

कलिसंतरण उपनिषद् में वर्णित यह महामंत्र कलयुग में भगवत्प्राप्ति का सबसे सरल और परम प्रभावशाली मार्ग है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।