हमारे साथ श्री महाकाल, तो किस बात की चिंता

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कर्ता करे ना कर सके,

शिव करे सो होय,

तीन लोक नौ-खंड में,

शिव से बड़ा ना कोय ॥

हमारे साथ श्री महाकाल,

तो किस बात की चिंता,

शरण में रख दिया जब माथ,

तो किस बात की चिंता,

हमारे साथ श्री महांकाल,

तो किस बात की चिंता ॥

लगाई है लगन शिव से,

नहीं फिर जग से मोह माया,

मेरे संग संग में रहती है,

मेरे महाकाल की छाया,

की बनती है वहां हर बात,

तो किस बात की चिंता,

हमारे साथ श्री महांकाल,

तो किस बात की चिंता ॥

मेरे महाकाल के दर पे,

संवर जाती है तकदीरे,

प्रभु का नाम लेते ही,

बदल जाती है तासीरें,

मेरे महाकाल रखते है,

हर एक के काम की चिंता,

हमारे साथ श्री महांकाल,

तो किस बात की चिंता ॥

लगा ले तू लगन शिव से,

के हो जा जग से बेगाना,

मुक्कदर अपना बनवा ले,

बन महाकाल दीवाना,

के हर लेंगे मेरे स्वामी,

तेरे हर काल की चिंता,

हमारे साथ श्री महांकाल,

तो किस बात की चिंता ॥

हमारे साथ श्री महांकाल,

तो किस बात की चिंता,

शरण में रख दिया जब माथ,

तो किस बात की चिंता,

हमारे साथ श्री महांकाल,

॥ दोहा ॥

तो किस बात की चिंता ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।