ग्यारस की रात बाबा की बात (कीर्तन की है रात)

संजय मित्तल
अन्य भजन भजन संजय मित्तल
॥ दोहा ॥

एकादशी पावन घड़ी, कीर्तन होय अनूप।
सांवरिया दर्शन दियो, मनमोहन स्वरूप॥

॥ चौपाई ॥

ग्यारस की रात बाबा की बात, कीर्तन में झूमे सारी रात।
आए हैं सांवरिया हमारे साथ, ग्यारस की रात बाबा की बात॥

अखंड ज्योत जली दरबार, महक रहा फूलों का हार।
भक्तों की टोली मस्तानी, गा रही श्याम की अमर कहानी॥
छम छम बाजे घुंघरू पाँव, झूम रहा सारा ये गाँव॥
ग्यारस की रात बाबा की बात॥

भोग लगे छप्पन पकवान, रीझे बाबा श्याम महान।
जो भी माँगे वो फल पावे, जीवन में कभी ना पछतावे॥
सारे कष्ट मिटाए पल में, ऐसी कृपा है इस जल में॥
ग्यारस की रात बाबा की बात॥

संजय मित्तल गाए संकीर्तन, पावन हो गया सबका तन-मन।
जय श्री श्याम के जयकारे, गूँज रहे हैं जग में सारे॥
ग्यारस की रात बाबा की बात, कीर्तन में झूमे सारी रात॥

॥ दोहा ॥

ग्यारस की महिमा बड़ी, कीर्तन परम पुनीत।
संजय मित्तल गावती, सांवरिया के मीत॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रत्येक एकादशी (ग्यारस) की रात्रि को होने वाले श्याम संकीर्तन, अखंड ज्योति और भक्तों के आलौकिक आनंद का सजीव चित्रण करने वाला उत्सव भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।