गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना

संत रविदास
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॥ पावन पाठ ॥

मैं शरण पड़ा तेरी चरणों में जगह देना,

गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना ।

करूणानिधि नाम तेरा,

करुन दिखलाओ तुम,

सोये हुए भाग्यो को,

हे नाथ जगाओ तुम ।

मेरी नाव भवर डोले,

इसे पार लगा देना,

गुरुदेव दया करके,

मुझको अपना लेना ॥

जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा ।

जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा ॥

तुम सुख के सागर हो,

निर्धन के सहारे हो,

इस तन में समाये हो,

मुझे प्राणों से प्यारे हो ।

नित्त माला जपूँ तेरी,

नहीं दिल से भुला देना,

गुरुदेव दया करके,

मुझको अपना लेना ॥

पापी हूँ या कपटी हूँ,

जैसा भी हूँ तेरा हूँ,

घर बार छोड़ कर,

मैं जीवन से खेला हूँ ।

दुःख का मार हूँ मैं,

मेरा दुखड़ा मिटा देना,

गुरुदेव दया करके,

मुझको अपना लेना ॥

मैं सब का सेवक हूँ,

तेरे चरणों का चेरा हूँ,

नहीं नाथ भुलाना मुझे,

इसे जग में अकेला हूँ ।

तेरे दर का भिखारी हूँ,

मेरे दोष मिटा देना,

गुरुदेव दया करके,

मुझको अपना लेना ॥

इन चरनन की पाऊं सेवा,

जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।