गुरु बिन घोर अँधेरा संतो

संत कबीर
श्री राम भजन Bhajan Guru Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गुरु बिन घोर अँधेरा संतो,

गुरु बिन घोर अँधेरा जी ।

बिना दीपक मंदरियो सुनो,

अब नहीं वास्तु का वेरा हो जी ॥

जब तक कन्या रेवे कवारी,

नहीं पुरुष का वेरा जी ।

आठो पोहर आलस में खेले,

अब खेले खेल घनेरा हो जी ॥

मिर्गे री नाभि बसे किस्तूरी,

नहीं मिर्गे को वेरा जी ।

रनी वनी में फिरे भटकतो,

अब सूंघे घास घणेरा हो जी ॥

जब तक आग रेवे पत्थर में,

नहीं पत्थर को वेरा जी ।

चकमक छोटा लागे शबद री,

अब फेके आग चोपेरा हो जी ॥

रामानंद मिलिया गुरु पूरा,

दिया शबद तत्सारा जी ।

कहत कबीर सुनो भाई संतो,

॥ दोहा ॥

अब मिट गया भरम अँधेरा हो जी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।