गुरुदेव आरती - श्री नंगली निवासी सतगुरु (Guru Aarti - Shri Nangli Niwasi Satguru)

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती Aarti Nangli Wale Baba Aarti
॥ पावन पाठ ॥

आरती श्री गुरुदेव जी की गाऊँ ।

बार-बार चरणन सिर नाऊँ ॥

त्रिभुवन महिमा गुरु जी की भारी ।

ब्रह्मा विष्णु जपे त्रिपुरारी ॥

राम कृष्ण भी बने पुजारी ।

आशीर्वाद में गुरु जी को पाऊं ॥

भव निधि तारण हार खिवैया ।

भक्तों के प्रभु पार लगैया ॥

भंवर बीच घूमे मेरी नैया ।

बार बार प्रभु शीष नवाऊँ ॥

ज्ञान दृष्टि प्रभु मो को दीजै ।

माया जनित दुख हर लीजै ॥

ज्ञान भानु प्रकाश करीजै ।

आवागमन को दुख नहीं पाऊं ॥

राम नाम प्रभु मोहि लखायो ।

रूप चतुर्भुज हिय दर्शायो ॥

नाद बिंदु पुनि ज्योति लखायो ।

अखंड ध्यान में गुरु जी को पाऊँ ॥

जय जयकार गुरु उपनायों ।

भव मोचन गुरु नाम कहायो ॥

श्री माताजी ने अमृत पायो ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।