गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

गोविंद मेरो प्रानधन, गोपाल मेरो मीत।
मृदुल कृष्ण हिय में बसे, बांकेबिहारी प्रीत॥

॥ चौपाई ॥

गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है।
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है॥

राधा का प्यारा वो, यशोदा का दुलारा वो।
सारे जग का पालनहार, भक्तन का सहारा वो॥
माखन चोर मेरो, चितचोर मेरो है।
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥

यमुना के तीरे वो, गौएं चरावे वो।
अधरों पे रखके वंशी, मीठी तान सुनावे वो॥
मुरलीधर मेरो, गिरिवरधर मेरो है।
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥

मृदुल कृष्ण गावे, प्रभु के गुण गावे।
चरणन में शीश नवाके, आनंद पावे॥
दीनबंधु मेरो, करुणासिंधु मेरो है।
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥

॥ दोहा ॥

सब जग त्यागी जो भजे, श्री बांकेबिहारी नाम।
मृदुल कृष्ण सोई लहे, परम पावन सुखधाम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भगवान श्री कृष्ण के प्रति पूर्ण आत्मीयता और अधिकार भाव—'प्रभु केवल मेरे हैं' की दिव्य शरणागति का महामंत्र संकीर्तन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।